Friday, 25 November 2011

फुरसत के लम्हे


सोचा था मैंने-------
सच्चाई को शब्दों की
जरुरत नहीं होती-----
पता नही था----
चुप रहनेवालों को
दुनिया चोर समझती है।




गम इस बात का नहीं------
बिना किसी गुनाह के
उसने इलज़ाम लगाया मुझपे-----
गम इस बात का है
मेंने झूठ को सच के साये में
पलने दिया।


वो नहीं समझ पायेंगे कभी-------
मेंने ऐसा क्यों किया ?
सदियों चल सकती थी सायेमें   उसके----
फिर भी कुछ लम्हों को  क्यों जिया ?????????


63 comments:

  1. आपके 'expressions'गजब के हैं निशा जी.
    आपकी प्रस्तुति का निराला अंदाज बहुत अच्छा लगता है.

    देरी से आने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ.
    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
    नई पोस्ट आज ही जारी की है.

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  2. बहुत ही बढ़िया मैम!

    ----
    कल 27/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. हर किसी में इस उन्मुक्ति की छटपटाहट होने चाहिए।
    खुद के लिए जितना भी जी सके जीना चाहिए।

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  4. वो नहीं समझ पायेंगे कभी-------
    मेंने ऐसा क्यों किया ?
    सदियों चल सकती थी सायेमें उसके----
    फिर भी कुछ लम्हों को क्यों जिया ?????????
    बेहतरीन ।

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  5. बहुत भावपूर्ण कविता....

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  6. बेहद गहन भावाव्यक्ति।

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  7. गम इस बात का है
    मेंने झूठ को सच के साये में
    पलने दिया।
    वो नहीं समझ पायेंगे कभी-------
    मेंने ऐसा क्यों किया ?
    सदियों चल सकती थी सायेमें उसके----
    फिर भी कुछ लम्हों को क्यों जिया

    बहुत ही खूब.
    खूबसूरत प्रस्तुति.

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  8. वो नहीं समझ पायेंगे कभी-------
    मेंने ऐसा क्यों किया ?
    सदियों चल सकती थी सायेमें उसके----
    फिर भी कुछ लम्हों को क्यों जिया ?????????bahut badhiyaa

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  9. बहुत खूब ||
    सुन्दर रचनाओं में से एक ||

    आभार ||

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  10. निशा जी आपने तो अपने भवो को कविता में पीरो दिया
    बहुत ही सुंदर..बधाई....
    नई पोस्ट में आपका स्वागत है

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  11. सदियों चल सकती थी सायेमें उसके----
    फिर भी कुछ लम्हों को क्यों जिया ?????????

    ....बहुत गहरी सोच समाये सुंदर अभिव्यक्ति...

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  12. Hi I had a little issue looking at your site but other then that it’s a really awesome site

    From everything is canvas

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  13. कभी-कभी सच को झूठ के साए में जीना होता है. एक कलिष्ट जीवन स्थिति का वर्णन करती सुंदर कविता.

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  14. आपके ब्लॉग को मैंने अपनी चुनिंदा सूची में रख लिया है.

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  15. बेहतरीन शब्द समायोजन..... भावपूर्ण अभिवयक्ति....

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  16. दुराचार जीतता तब सदाचार चुप रहता जब ........अच्छी रचना .

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  17. बहुत अच्छी कविता निशा जी |ब्लॉग पर आने के लिए आभार |

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  18. निशा जी खूबसूरत रचना के लिए बधाई

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  19. बेहतरीन कविता, सुंदर भाव !

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  20. गहन अभिव्यक्ति... सुंदर रचना

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  21. वो नहीं समझ पायेंगे कभी-------
    मेंने ऐसा क्यों किया ?

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  22. सदियों चल सकती थी सायेमें उसके----
    फिर भी कुछ लम्हों को क्यों जिया ?????????

    गहन अभिव्यक्ति .........

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  23. बहुत रोचक और सुंदर प्रस्तुति.। मेरे नए पोस्ट पर (हरिवंश राय बच्चन) आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  24. पश्चाताप की अग्नि अधिक दुखदायी होती है।

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  25. गम इस बात का है
    मेंने झूठ को सच के साये में
    पलने दिया।

    sunder abhivyakti!

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  26. सुंदर भावो से सजी रचना,
    मेरे पोस्ट 'शब्द'में स्वागत है

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  27. बहुत सुन्दर रचना ...! भाव का अनूठा मिश्रण !

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  28. वाह! बहुत खूब लिखा है आपने ! ख़ूबसूरत एवं भावपूर्ण रचना!

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  29. बहुत सुंदर भावों से बेहतरीन रचना....

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  30. सुन्दर भाव रचना मन भाई .

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  31. बहत सुन्दर रचना ..आभार

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  32. निशा जी,...
    मेरे नए पोस्ट "प्रतिस्पर्धा"में है इंतजार...
    पछली पोस्ट में आने दिल से आभार ...

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  33. अरे वाह - :)
    सच को सच ही में किसी शब्द की आवश्यकता नहीं होती - हाँ झूठ को expose करने के लिए कभी कभी सच का मुखर होना आवश्यक हो जाता है |

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  34. क्या बात है । आपेक पोस्ट ने बहुत ही भाव विभोर कर दिया । मेरे नए पोस्ट पर आपका आमंत्रण है ।

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  35. सच को पलने को कुछ और समय तो दीजिये...सच बलवान है इसलिए सदा ही विजयी है.
    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया...आते रहिये यही गुजारिश :)

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  36. आप की रचना बड़ी अच्छी लगी और दिल को छु गई
    इतनी सुन्दर रचनाये मैं बड़ी देर से आया हु आपका ब्लॉग पे पहली बार आया हु तो अफ़सोस भी होता है की आपका ब्लॉग पहले क्यों नहीं मिला मुझे बस असे ही लिखते रहिये आपको बहुत बहुत शुभकामनाये
    आप से निवेदन है की आप मेरे ब्लॉग का भी हिस्सा बने और अपने विचारो से अवगत करवाए
    धन्यवाद्
    दिनेश पारीक
    http://dineshpareek19.blogspot.com/
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

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  37. सुन्दर अगीत हैं आपके ...

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  38. बहुत सुंदर रचना निशा जी,
    आभार ब्लॉग पर आने का !

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  39. बहुत ही सटीक भाव..बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    बेहद खूबसूरत ...पोस्ट
    शुक्रिया ..इतना उम्दा लिखने के लिए !!

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  40. सुन्दर प्रस्तुति | मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  41. ""♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
    भय से मुक्ति प्राप्त करोगे, तभी साहसी बन सकते हो!
    अछल साहसी ही बनने से, सत्य वचन पे ठन सकते हो!
    भय की माला जपने से तो, केवल हार मिलेगी तुमको,
    कर्म की युक्ति प्राप्त करोगे, तभी सफलता जन सकते हो!"

    निशा जी, बहुत ही प्यारी रचना है जो सच को प्रदर्शित करती है! नमन आपकी लेखनी को!

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  42. वो नहीं समझ पायेंगे कभी-------
    मेंने ऐसा क्यों किया ?
    सदियों चल सकती थी सायेमें उसके----
    फिर भी कुछ लम्हों को क्यों जिया ?????????
    sunder bhav
    rachana

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  43. very nice post, i certainly love this website, keep on it

    From Great talent

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  44. इस पोस्ट के लिए धन्यवाद । मरे नए पोस्ट :साहिर लुधियानवी" पर आपका इंतजार रहेगा ।

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  45. औरों की ग़लत सोच का ग़म सत्कर्मी को क्यों? अपनी नेकी के आत्मसंतोष से बड़ा नहीं हो सकता उनका ज़बरिया क्लेश।

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  46. "मेंने झूठ को सच के साये में
    पलने दिया"...kafi gambheer soch hai..bahut khub!
    http://isangam.blogspot.com/
    http://sangamkarmyogi.blogspot.com/

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  47. अक्सर चुप रहने वाले पे इलज़ाम ही लगते हैं ...

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  48. आपकी प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट "खुशवंत सिंह" पर आपका इंतजार रहेगा ।

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