Monday, 30 January 2012

तुम्हारी बारी

तेरे गम को साझा किया मैने,
अब तक न हिम्मत हारी है
आज अभी अब दुखी हूँ मैं भी
अब तुम्हारी बारी है।


          १

मेरे उर ने पढे हैं
 तेरे नैनों की की सब भाषा
सागर तेरे पास है फिर भी
तुम क्यों बैठे प्यासा ?
मीठा पानी,खारा पानी
या सब एक जैसा ?
साल नही महीना नही
एक पल मुझ पर भारी है
मैने तेरा साथ निभाया
अब तुम्हारी बारी है।



         २

मानव के इस जंगल में
इंसां ढूँढना मुश्किल है
वो मानव जो दिल नही
दिमाग के वश में रहता है
संबंध नही समझते जो सिर्फ
अपना मकसद साधता है
मंजिल तेरी यहीं कही है ?
या कही और की तैयारी है ?
मैने तेरा साथ निभाया
अब तुम्हारी बारी है।

Tuesday, 24 January 2012

सागर का दर्द


बरसों से मिलने की आस लिये बैठा हूँ
इंतजार की आग में पल-पल जला करता हूँ
ख्वाबों से तेरे,दिल को बहलाये रहता हूँ
सागर हू फिर भी, मैं प्यास लिये बैठा हूँ ।


इठलाती नदियाँ औ बलखाती तालें हैं
सतरंगी सपनों का संसार लिये फिरता हूँ
तेरे दरश को पलक बिछाये रहता हूँ
सागर हूँ फिर भी,मैं प्यास लिये बैठा हूँ।


विरह में  मैं पागल, दिवाना मैं घायल
सीने में अपने हलचल दबाये रखता हूँ
मौन की अनुगूँज में खुद को डूबाये रखता हूँ
सागर हूँ फिर भी, मैं प्यास लिये फिरता हूँ।


खुद का सुधबुध औ चैन गँवाये बैठा हूँ
लहरों की तरंगों में गम को छिपाये बैठा हूँ
नैंनों से अपने मैं,नींद भगाये रहता हूँ
सागर हूँ फिर भी,मैं प्यास लिये बैठा हूँ

Monday, 23 January 2012

उपलब्धि


करती हूँ एक प्रश्न सखी ........
करना तुम मत शोर 
बेचैनी घिर आई है 
अंधेरा घनघोर .
किसने तुमको राह बताई 
किसने दिया सहारा ?
या खुद ही मंजिल को ढूंढा.....
सारा श्रेय तुम्हारा ?
आगे बढती धारा का जब कोई 
मार्ग अवरुद्ध करता होगा ......
सच बतलाना आली मुझको ......
क्या दिल तेरा चुपके -चुपके ......
रोता होगा ?????????
फिर भी तुमने हार  न मानी
वो स्वाभिमानिनी निर्भय तरंगणी....
 प्रगति औ प्रवाह अपना कर
स्वच्छ हमेशा रहता तेरा पानी .....
कभी ऊँचे से नीचे बहती 
कभी  नीचे से ऊँचे बहती 
रोते हँसते गाती गाना 
तेरे जीवन की उपलब्धि का ?
क्या है वही भेद पुराना ..........


ये कविता ८-१० साल पहले की  लिखी हुई है .




Saturday, 14 January 2012

मेरी जरूरत हो तुम .......

आज मेरी बिटिया ईशा  महाराणा  का जन्मदिन है .१५ जनवरी १९९२ शाम ७.२५ दिन बुधवार का था .....जब उसने मुझे माँ बनने की अनुभूति से रूबरू कराया था. सच सृजन का सुख अदभुत एवम अनोखा होता है जिसे सारी माएं ही महसूस कर सकती है .......आइये अपनी उस अनुभूति से आप सभी को अवगत कराऊँ ......


आज ही के दिन मेरी बगिया में
कोयल गुनगुनाई थी
बनकर नन्ही सी परी
मेरी गोद में जब तुम  आई थी
ऐसा लगा था...............
सारे जहाँ की खुशियाँ
मेरे आँचल में समाई थी ....


 मेरे इन्द्रधनुषी जीवन के
सात रंग हो तुम
मेरे जीवन संगीत की
सुर सात हो तुम
मेरे दिल की धडकन
नैनों की ज्योति  हो तुम
एक प्यारी चंचल हिरनी  सी ....
ममता की मूरत हो तुम
तुम्हें पता नहीं पर .....
मेरी जरूरत हो तुम......


मेरे सहमे हुए दिल को जब .....
 हिम्मत बंधाती हो तुम
तब बिटिया नहीं बल्कि
माँ के रूप में नजर आती हो तुम .....

तुम्हारे जन्मदिन पर ....
मेरी यही है शुभकामना ...
दुनिया बदल जाये पर ........
तुम न बदलना
सुख औ दुःख को
समभाव से ग्रहण करना
याद रखना .........


जीवट इन्सान कभी
दुःख से बिखरता नहीं
दुःख से जो निखरता
है जीवट इन्सान वही........


जब भी मुश्किलों में हो
मुझे याद कर लेना
माँ का दंड समझ
उसे आत्मसात कर लेना
देखना तुम्हें अपनी राह
स्वंय मिल जाएगी
भले ही दूर हो मंजिल
पर वो खुद ही चलकर
तेरे पास आएगी ......
तेरे पास आएगी .....




Wednesday, 11 January 2012

कही-अनकही

जरुरी नहीं की .........
हर बात का जबाव दिया जाये
भीड़ में बहुत जी लिया ......
अब तन्हाई का भी .....
मजा लिया जाये .....

वो हिम्मत ही क्या ?
जो टूट जाये .....
वो आस ही क्या ?
जो छूट जाये ....
वो दोस्त ही क्या ?
जो रूठ जाये ........



Friday, 6 January 2012

यादें

आज मेरी माँ  की पुण्यतिथि है .माँ की  यादों से दूर जाना नामुमकिन है उनके विदाई की पीड़ा को भी व्यक्त करनाआसान नही .बस एक छोटी सी कोशिश.

बहुत दिन बीते ,रातें बीती
यादों का पल भारी है
आज भी मन के वीरानों में
यादों का बहना जारी है .

यादें मेरे बचपन की
यादें तरुणाईपन की
 यादें तेरी जुदाई की
यादें तेरी विदाई की .

शब्द खो गये सचमुच मेरे
दुःख -दर्द भंवर अभी  जारी है
रूप दे सकूं कैसे मै ?
पल -पल मुझ पर भारी है .........
भूल जाऊं कैसे उस पल को ?
जो याद तुम्हारी दिलाती है ......
बिखरे -बिखरे सपने मेरे
मजबूरी पर रोती है
जाते -जाते तुमने आवाज बहुत ही दिया
माफ करना माँ मुझको
मैंने   ही नजरंदाज किया .

सोते -जगते ,उठते -बैठते
याद तुम्हारी आती थी
सोच -सोच के सचमुच मेरी
आँखें भर -भर आती थी
नींदों में भी कोई ताकत
आकर मुझे जगाती थी
सपनों में तेरी परछाई
आकर मुझे बुलाती थी
सुन लेती थी ,समझ गई थी
तेरा साथ छुटनेवाला है
गागर मेरी ममता का
जल्द ही फुट्नेवाला है ........
इंतजार मत करना वर्ना ........
शोकमय हो जाउंगी
काम खत्म होते ही माँ ....
मै तुमसे मिलने आउंगी .

वैसे मुझे माँ से बिछुड़े एक दशक ही हुआ है पर लगता है की सदियाँ   बीत गई है .