Saturday, 25 August 2012

तन्हा हूँ पर ......

भीड़ में अकेले रहने का हुनर
पेड़ हमें सिखाता है ...
प्रकृति  का पहरेदार
अटूट विश्वास का पाठ  पढाता है
नि:शब्द हमें वह कहता है .....
तन्हा हूँ पर ......
आओ बन्धु
दूंगा मदद की छांह
मुझमें समाया हुआ है
प्यारा सा इक गाँव
कल क्या होगा ??????
पता नहीं ...
जाता हूँ मै कहीं नहीं
रफ्ता -रफ्ता जिन्दगी का
साथ निभाए जाता हूँ ...
अपनी तन्हाई के संग
झूम -झूम के गाता हूँ ...
तुम भी आओ
तुम भी गाओ
तन्हाई से प्यार करो ...
मिल रहा है जो जीवन में
ख़ुशी -ख़ुशी स्वीकार करो ....

Monday, 30 July 2012

केदारनाथ चलें

                          

    

ब्लोगर साथियों आज  केदारनाथ यात्रा के बारे में बता देती हूँ बहुत दिन हो गए ...
कभी कंप्यूटर साथ नही दे रहा था तो कभी समय ...
29.5. को हम उत्तरकाशी से सुबह 7 बजे केदारनाथ के लिए रवाना हुए ....
जल्दी निकलने के मूड में थे हम पर पेट्रोल ख़त्म हो जाने की वजह से देर हो गई थी ..
जब पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल मिला तब हमारी यात्रा शुरू हुई ...
पेट्रोल का ध्यान रखना जरुरी है ...हमें कई बार परेशानी हुई ...
खैर जैसे तैसे शेरसी पहुंचे शाम के 4.45 में ....
पता चला की अब केदारनाथ नही जा सकते  क्योंकि रिपोर्टिंग टाइम निकल गया है
जबकि हमें कहा गया था की रात के 8 बजे तक फ्लाईट जाती है ..
हमको  कहा  गया आपका टिकट बेकार हो गया ...लास्ट फ्लाईट शाम के 5 बजे तक जाती है ...
हम सभी तनाव में आ गए ...जैसे तैसे करके एजेंट से बात की ...
तब हमें 30 .7 को आने के लिए कहा गया ...30 को शाम 3 बजे हमारी बारी आई ...
हमने हरिद्वार से ही हेलीकाप्टर के लिए बुकिंग कराई  थी।..रात हमें शेरसी में रुकना पड़ा ...
        










                             उत्तरकाशी से केदारनाथ के रस्ते में चाय के लए रुके थे हम .....






   अपनी बारी का इन्तजार   ...




    केदारनाथ पहुच गए हम .......आख़िरकार  मेरा सपना पूरा हुआ ...जिसके बारे में मै  सोचती थी
की मैं कभी केदारनाथ नही जा सकती क्योंकि मुझे ऊंचाई से बहुत डर  लगता है ...पर अधिकारी जी
और उनकी पत्नी शशि के साथ हमारी ये यात्रा पूरी हो गई ....बहुत बहुत धन्यवाद उनको ....







बहुत सुन्दर दृश्य थे ...दिल खुश हो गया ....


कुछ -कुछ जगह बर्फ भी थे बहुत मजा आया   ....


सभी फिसल रहे थे  ..गिर रहे थे ...हँसते -हँसते बुरा हाल था  था मेरा
हाँ मै नही फिसली ...







मंदिर के करीब हैं हम ...








हम 3 बजे शाम में केदारनाथ पहुँच गए थे ..6 मिनट लगा शेरसी से आने में ..हेलिकोप्टर द्वारा
ज्यादा चलना नही पड़ा ....बर्फ पर हमने खूब मजे किये ...3.30..बजे शाम को दर्शन के लिए हम लाइन में लगे ..
5.30 में दर्शन हुए ...रात वही रुकना पड़ा ....










दुसरे दिन सुबह लौट गए ...रात और सुबह ठण्ड थी वैसे मौसम बड़ा अच्छा था






                                           बाहर बहुत ठण्ड थी अत: अन्दर आ गए हम ...


                                                  चाय की जरुरत थी ठण्ड की वजह से ...







कुल मिला कर बहुत मजा आया .....देर से पहुचने की वजह से कुछ तनाव अवश्य हो गया था ...
इसलिए जरुरी है की टिकट बुक कराते समय ये बातें साफ हो जाय क्योंकि जाम की वजह से भी कई बार देर हो जाती है .....

फिर मिलते है ........धन्यवाद    ....

Saturday, 7 July 2012

गंगोत्री चलें

ब्लोगर साथियों आइये आज आपको गंगोत्री ले चलती हूँ हालाँकि उधर चढ़ाई नही करनी पड़ती है ...गाडी चली जाती है ...पर उधर का रास्ता बड़ा खतरनाक है पतली सड़क है डर के मारे जान निकल जाती है ....दो चार किलोमीटर ही है पतली सडक  ...राम ..राम करके निकल जाता है ...आइये कुछ झलकियाँ आपके साथ बाँटती हूँ ....






गंगोत्री के लिए प्रस्थान की तैयारी



हम तैयार  हो     गए हम पर ड्राईवर साहब गायब हैं ...रात में उनकी
तबियत ख़राब हो गई थी ......हम     जल्दी तैयार हो गए थे पर उनकी वजह से देर हो गई ...
खैर 8.30 बजे सुबह हम उत्तरकाशी के लिए रवाना हुए ....    









पति केसाथ  ...



1 बजे हम उत्तरकाशी पहुंच गए ..
जहाँ की      काशी विश्वनाथ मंदिर है ..हमने दर्शन किये ...
शाम को 3 बजे हम भटवाडी  के लिए रवाना हुए ...
हमें रात में वहीं रुकना था क्योंकि मेरा भतीजा वहीं पोस्टेड था ..
शायद उसके भी दिली पुकार ने मुझे उत्तराखंड के चारोधाम की यात्रा करवाई ..
पिछले साल ही मैं  हरिद्वार होकर आई थी ...
पर समय की कमी की वजह से ये यात्रा नहीं कर पाई

पर रूपेश (भतीजा ) बार बार फोन करता था की दीदी आओ ..
इस बार गर्मी में मेरे पास 10 दिन रहो मै अपनी गाडी से घुमा दूंगा ....
रहना तो मुश्किल था इतना दिन अत: हमने रात वहीं बिताने की सोची वैसे भी गंगोत्री उस दिन पहुंचना मुश्किल था ...











बेटी के साथ ...वैसे ग्रुप वाले भी थे ..डॉ साहब भी हैं पीछे अधिकारी जी भी हैं ..





रास्ते में मुनेरी डेम मिला ...
बहुत ठंडक थी वहां ...इस फोटो में करीब सभी थे ... ..

आइये उनका परिचय करवा दूं

डॉ सुशील आत्रे   (नेत्र  रोग ) ,उनकी बीवी राजश्री आत्रे
अम्बरीश अधिकारी उनकी बीवी शशि अधिकारी
मेरी ननद सुलोचना देवी
मैं एवम मेरे पतिदेव संजय महाराणा ....








मेरी बगिया के दो फूल...
 बेटा संकेत एवम बिटिया ईशा





मेरा भतीजा ..रूपेश ..







अपने मिनी मायके में ......
सच में मायके के नाम से ही चेहरा चमकने लगता है।.









दुसरे दिन सुबह 5.30 बजे हम गंगनानी के लिए रवाना हुए ..
 गंगनानी पहुंचे ...वहां गरम पानी के कुण्ड में नहाये ...
पानी बहुत गरम था ..लोग लोटे से नहा रहे थे ...
हमें लगा की अगर हमारे पास भी लोटा रहता तो अच्छा होता ..







पानी बहुत गरम था पर लोग पानी में उतरकर नहा रहे थे .....मुझे भी बाद में लगा की
पानी में उतरकर ही नहाना था ....गंगनानी से हम नहाकर गंगोत्री के लिए पौने आठ में
रवाना हो गये ...












ख़ुशी -ख़ुशी हम कालभैरव के दर्शन कर  रहे थे पर .....एक दुःख खबरी हमारा इन्तजार कर रही थी

रूपेश के पापा जिनकी रात से ही तबियत ख़राब थी उनको सुबह इलाज के लिए
डॉ ''के यहाँ ले जाया जा रहा था ..उनकी डेथ हो गई ...
मै  आज भी रूपेश का रोता हुआ वो चेहरा नही भूल
पा रही हूँ ...


मुझे याद है मैंने उससे कहा था की दर्शन में देर तो नही होगी ..
उसने कहा था ..दीदी मैं विशेष दर्शन करवा दूंगा ...वहीं मेरी ड्यूटी है ..
पर इस खबर के साथ उसे लौटना पड़ा ...उसके पापा मेरे चचेरे चाचा हैं ...बहुत दुःख हुआ ..
इतनी छोटी सी उम्र में इतना बड़ा दुःख ?












बोर्ड देखकर राहत मिली ....मंजिल पास है ...








गाड़ी को पुलिसवाले ने पीछे रोक दिया ..
हम 11बजे पहुंचे गंगोत्री ..
जल्दी पहुँचते तो गाडी आगे तक आ सकती थी ...1-2 किलोमीटर चलना पड़ा ...








बहुत भीड़ थी ...विशेष दर्शन के लिए पैसे देकर हमने दर्शन किये .....









जल्दी आओ ......सच में बड़ी भीड़ थी ...रूपेश की बड़ी याद आई ....





दर्शन करके गंगोत्री से हम 1.16 बजे उत्तरकाशी के लिए  रवाना हो गये ...








दर्शन करके लौट आये .....किसी का इन्तजार ..











लो ... मै  आ गई ....









मम्मी....... मै  भी ...






राह में पडाव.... वाह....... लकड़ी का घर ....हवा भी खुश ...




मम्मी..... फूल भी सुन्दर ....चाय के लिए ब्रेक में हम माँ -बेटी मजे कर रहे हैं ...




















प्राकृतिक दूश्यों के मजे लीजिये ....भटवाडी के आसपास का दृश्य है ....





जंगल में लगी आग (दावानल)).....6 बजे शाम में हम उत्तरकाशी पहुंच गए ..
बस स्टैंड से ये दावानल दिख रहा है .
यहाँ पर रहने के लिए होटल एवम धर्मशाला भी काफी मिल जाता है ...
बस स्टैंड के पास ही हमने होटल लिया क्योंकि अगले दिन हमें केदारनाथ के लिए
प्रस्थान करना था ......


फिर मिलते हैं .......








Monday, 25 June 2012

क्षणिकाएँ

ब्लोगर साथियों थोडा ब्रेक लेती हूँ .....यात्रा की बातें अगली कड़ी में आज .........कुछ क्षणिकाएँ .....

जग से लड़ना
छोड़ दिया
खुद से लडूंगी ....


मत तोड़ो
दुःख होगा
सच कहती हूँ ......


छोटी सी ये जिन्दगी
छल से तुम्हारी
लंबी हो गई .....


खुशियाँ देनी चाही मैंने
तुमने पर्वत सा
गम दे दिया ....



मन के मीत
मेरे जीवन संगीत
भूल मत जाना .....



ये रात ,ये दिन
कटते नही
तुम बिन ....


तुम आये
बहार आई
दिल ने गाया 
आँखें मुस्कुराई .....


मै तो नहीं भूली
तुम भूल जाओ
दू:खी हुई मै
तुम मुस्कुराओ .....

Sunday, 17 June 2012

यमुनोत्री की यादें


ब्लागर सथियों आज अपनी यात्रा का संचिप्त विवरण प्रतुत कर रही हूँ ......
हम चार परिवार थे जिन्होंने एक साथ इस यात्रा का प्लान बनाया था ...जिनमे आठ बड़े और पाँच बड़े  बच्चे थे .हरिद्वार में ही टूरिस्ट एजेन्सी से बात करके टेम्पों ट्रेवेलर जो की 14 सीटर थी उसे बुक कराया .वैसे खतरनाक
रास्तों को देखकर मुझे महसूस हुआ की बस में जाने के बजाय इस प्रकार की गाडी ही ठीक है ..हम सुबह नौ बजे  हरिद्वार से चले थे  एजेंसी के प्लान के अनुसार हमे शाम तक जानकी चट्टी पहुचना था पर नही पहुच पाए ...इसका कारण शायद ये भी हो सकता है की गाड़ी हरिद्वार से देर से चली और गाड़ी तथा ड्राईवर दोनों पंजाब के थे .ड्राईवर को रस्ते की जानकारी नही थी .....सच ये जानकर मुझे और भी डर लगने लगा था ...मैंने खुद को जीभर कोसा की ये जानकारी मैंने पहले क्यों नही ली ...खैर अब तो कुछ नही किया जा सकता था ...
मैंने ड्राईवर से कहा ..भैया गाड़ी धीरे चलाओ ....उसने भी सहमती वयक्त करते हुए गाडी धीरे चलाई ..अंजान होने की वजह से रास्ते की जानकारी भी लेनी पड़ती थी ....शाम करीब सात बजे हम सयाना चट्टी के पहले पालिगाड  नामक स्थान में रुके .यात्रा को सुखमय बनाने के लिए ये जरूरी है की सुबह जितना जल्द हो रवाना हो जाईये और शाम को विश्राम कीजिये इससे होटल भी अच्छा और उचित रेट पर मिल जाता है ..
रात  हो जाये तो मज़बूरी में रहना पड़ेगा ....आइये चित्रों के माध्यम से   आप भी एक झलक लें ....


....



यमुनोत्री  देहरादून और मसूरी होकर गए थे ....मसूरी की एक झलक .....

साथ में पतिदेव और उनकी बहन ......





पालिगाड का वो होटल जिसने हमें बसेरा  प्रदान किया ...
हम प्रथम ग्राहक थे उसके ....अपनी रोटी  खुद बनाई थी ...

असल में जानकी चट्टी के चक्कर में देर हो गई फिर अंधेरा छाने लगा था ..अत:रुकना पड़ा ...
























वाह मनभावन दृश्य ......थकान और रास्ते का भय काफूर ......












जानकी चट्टी से चढ़ाई शुरू कर दी समय 8.30(सुबह )




थोडा आराम .......





वो राही तुम रूको नहीं ....




वीर तुम बढे चलो ......






चाय  पी  लेते हैं ......





















यमुनाजी के दर्शन  कर लें ......









5 किलोमीटर की दूरी हमने 4.5 घंटे में पूरी की।.






अकेले उतरने का भी अलग मजा है ...कोई तनाव नही ...प्राकृतिक दृश्यों को देखते हुए  बहुत अच्छा लगता है. ..
सच में जीवन में जब आप उँचाई पर चढ़ते हैं ...तब साथ की जरुरत होती है क्योकि उस समय 
हम दबाव और तनाव में जीते हैं पर नीचे उतरते हुए हम बेफिक्र होते हैं ...दौलत और शोहरत 
हमें कमजोर बनाती है ...मजबूत नही ....अत: इन्सान को उसे अपनी दासी बनानी चाहिए उसका  दास 
नही बनना चाहिए .......ये मेरे  विचार हैं आपकी आप जानो.......








आख़िरकार जंग जीत ली .....विश्वास नही होता ......
नीचे उतर गए हम .......

यात्रा को आसान  बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें ....
सभी के पास पैसे होने चाहिए ...
समूह में लोग बिछड़  जातें हैं ...बच्चों के साथ कोई न कोई अवश्य रहें ...
जो चल नही पातें वे पालकी में जाएँ ....
खच्चर हरगिज न करें ....
चढ़ते या उतरते समय कोशिश करें की पहाड़ी के तरफ रहें ...
 एक शाल या स्वेटर अवश्य रखें ....
बाकि भगवान् पर छोड़ दें .....


चलिए फिर मिलेंगे ...........