Thursday, 20 March 2014

माँ----बनकर देखो -

हर साँस से  सपने 
उर से स्नेह ---
 प्रकृति के कण -कण से 
सुखों की  बरसात हो रही थी 
उपलब्धि बड़ी नहीं--छोटी सी (?) थी ---
एक माँ अपने बच्चे को ढूध पिला रही थी-- 

नकली आवरण 
नकली शानों-शौकत 
नकली खुशियों को फेंको 
दुनियाँ तेरी बदल जायेगी 
माँ----बनकर देखो ----



24 comments:

  1. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, शनिवार, दिनांक :- 22/03/2014 को "दर्द की बस्ती":चर्चा मंच:चर्चा अंक:1559 पर.

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    1. धन्यवाद राजीव जी ...

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  2. बहुत सुंदर ..... गहरी बात कही आपने

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  3. कोमल भाव ..बहुत प्यारी रचना....

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  4. मातृत्व से ओत-प्रोत पावन भाव ....!!सुंदर रचना ....!!

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  5. दुनियाँ तेरी बदल जायेगी
    माँ----बनकर देखो ----
    माँ ,,,,,शब्दों में रहकर भी शब्दों से परे होती हैं !

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  6. बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति...

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  7. बहुत सुन्दर, २४ कैरेट शुद्ध सोने की बात कही आपने !
    latest post कि आज होली है !

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  8. असली सुख मां बनने में ही है ..

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  9. आदरणीय , बहुत हि सुंदर कृतियाँ , धन्यवाद
    नवीन प्रकाशन -: बुद्धिवर्धक कहानियाँ - ( ~ अतिथि-यज्ञ ~ ) - { Inspiring stories part - 2 }
    बीता प्रकाशन -: होली गीत - { रंगों का महत्व }

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  10. माँ बननाबहुत ही खूबसूरत अनुभव जो मन की अनेक सुन्दर भावनाओं से जुड़ा होता है .-स्नेह,गर्व,ममता ,और अपने निजत्व की व्याप्ति का सुख !

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  11. गहरा भाव लिए ... ऐसा आनंद जिसे सिर्फ नारी ही समझ, भोग सकती है ..

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  12. खूबसूरत ही नहीं जहीन माँ कि महिमा कहती पोस्ट सादर नमन

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  13. bahut hi gahara bhav ,maa ke mahatav ko pratipadit karati rachana

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  14. बहुत सुन्दर है प्राथमिक आहार का दान

    बहुत सात्विक है स्तन पान करवाना

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  15. Ek maa ka marm ek maa hee samjh sakti hai:)

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