
नाउम्मीदी से भरे दिलों में
उम्मीद की किरण जगाते हो.… इसीलिए,,,
बसंत--- तुम..... ऋतुराज कहलाते हो.....
यहाँ-वहाँ सारे जहाँ में
छोटे-बड़े का भेद किये बिना
गुलशन को महकाते हो..... इसीलिए ,,,,
बसंत ---तुम.… ऋतुराज कहलाते हो.…
माँ शारदे का प्रसाद
होली का अल्हड आह्लाद
झोली में लेकर आते हो..... इसीलिये,,,,
बसंत ---तुम.…ऋतुराज कहलाते हो.…
गाँव शहर हर गली की बिटिया
निर्भय जीवन जी पाये
कोई भी दुष्कर्मी उसके
अस्मत / भावनाओं से खेल न पाये
फिज़ा में ये रंग कब-तक बिखराओगे
उसी बसंत का इन्तजार है
बोलो बसंत ! कब आओगे ?