Thursday, 29 March 2012

बातें खुद से

 

आगाज भी होगा

अंजाम भी होगा

नाम उसी का गूंजेगा

गुमनाम जो होगा .......



अस्तित्व बचाना
खुद का
सीमा मिट न पाए
करीब किसी के
इतना भी न होना कि?????/
वो दूर चला जाये ......


देते -देते सहारा किसी को ....
बेसहारा न हो जाना
फरियाद किसी कि सुनते -सुनते
फरियादी न बन जाना .....

दो नैनों में सपने पलते हैं
इसी को जीवन कहते हैं
कभी आंसू ..कभी मुस्कान ...तो ???/
कभी दर्द बनकर उभरते हैं ........

32 comments:

  1. बहुत सुन्दर निशा जी...

    देते -देते सहारा किसी को
    बेसहारा न हो जाना..........

    कभी कभी भावनाओं में बहना भारी पड़ता है...

    बहुत अच्छी रचना.
    सस्नेह

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  2. भावुकता और व्यावहारिकता में संतुलन आवश्यक है. सुंदर कविता.

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  3. बहुत सुन्दर !

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  4. खूबसूरत बिखरे मोती .... अच्छी प्रस्तुति

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  5. सुन्दर कविता

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  6. सुन्दर अभिव्यंजना .

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  7. बिलकुल सही फरमाया आपने...सुन्दर रचना!

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  8. जब तक अपने अस्तित्व को बचाने का ध्यान रहेगा,तब तक करीब जाना संभव होगा ही नहीं। जो करीब जाने पर दूर चला जाए,वह अभागा।

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    1. aapke vicharon se sahmat hoon par maine dekha hai ki kai bar
      najdikiyan durion ko badha deti hai ye meri kavita nhi hai blki kai panktiya kaiyon ke jivan ki sacchai hai.thanks nd aabhar.

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  9. करीब और दूर होने का प्रश्न ही नहीं... ऐसी अवस्था होनी चाहिए जहाँ मैं और तू, दूरी और कुर्बत का सवाल ही न रहे!!
    कविता अच्छी है!!

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    1. aapke vichar ka swagat hai pr mere vichar se simaon ke atikraman se dm ghutne lgta hai aur iska asar hmare sambandhon pr pdta hai,thanks n aabhar.

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  10. वाह ! ! ! ! ! बहुत खूब सुंदर रचना,
    बेहतरीन भाव प्रस्तुति,....

    MY RECENT POST ...फुहार....: बस! काम इतना करें....

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  11. गहरे भाव हैं कविता के। फ़रियाद सुनते सुनते फ़रियादी बनने के बीच एक महीन रेखा ही है, जो फ़रियादी बनने से रोकती है। आभार

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  12. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

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  13. अस्तित्व बचाना
    खुद का
    सीमा मिट न पाए
    करीब किसी के
    इतना भी न होना कि?????/
    वो दूर चला जाये ......

    बहुत बड़ी सीख है ये सभी के लिए..... उम्दा रचना

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  14. सभी परिस्थितियों में सन्‍तुलन बनाये रखना प्रसन्‍नता की चाबी है।

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  15. दो आँखों मे एक से हसना एक से रोना है....

    सुंदर अभिव्यक्ति....
    सादर।

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  16. आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया....बहुत बेहतरीन प्रस्‍तुति...!

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    1. apna bahumulya samay nd sujhab dene ke liye aabhari hoon mai aapki sanjay jee....

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  17. कल 31/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  18. thanks monika jee,sonrupa jee.manoj jee nd habib jee.

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  19. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  20. करीब किसी के
    इतना भी न होना कि
    वो दूर चला जाये ......
    बेहतरीन ...बधाई !

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  21. दो नैनों में सपने पलते हैं
    इसी को जीवन कहते हैं
    कभी आंसू ..कभी मुस्कान ...तो ???/
    कभी दर्द बनकर उभरते हैं ........

    ....बहुत सच कहा है. यही जीवन की वास्तविकता है...सुन्दर प्रस्तुति..

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  22. अरे वाह! कमाल की नसीहत दी है आपने.
    आपकी खुद से बातें लाजबाब हैं,निशा जी.

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