Thursday, 9 February 2012

घर





छोटा सा इक घर हो
प्यारा सा परिवार
परम-आनंद की ज्योती हो
न हो वहाँ आग
प्यार सिर्फ प्यार का
जलता रहे चिराग।

17 comments:

  1. प्यार सिर्फ प्यार का
    जलता रहे चिराग।

    सुंदर, संक्षिप्त, सार्थक रचना

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  2. एक घर के लिए इतना ही पर्याप्त है... और क्या चाहिए... सुंदर रचना

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  3. ghar ghar hee rah jaaye
    to kitnaa achhaa ho
    pyaar bhaai chaare se vimukt
    sirf rahne kee jagah ban jaataa
    to nark se kam nahee hotaa

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  4. सुंदर, सार्थक रचना....

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  5. बहुत सुंदर रचना ...

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  6. ऐसी कामना तो हर किसी की होती है ..लेकिन यह सब होने के बाबजूद भी इंसान कहाँ चैन से रह पाता है ...!

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  7. यह घर नहीं मंदिर है!

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  8. बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

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  9. सुंदर, संक्षिप्त, सार्थक रचना...

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  10. प्यार मकान को घर बना देता है।
    सुंदर रचना।

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  11. छोटी-सी, लेकिन सार्थक और प्यारी रचना.

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  12. वाह! बस प्यार ..प्यार..प्यार...
    प्यारी सी रचना के लिए आभार,निशा जी.

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