Tuesday, 28 May 2013

पर ...आखिर में

कहते हैं कि सुबह का भूला शाम को 
घर लौट ही आता है .....
                                                                       
लौट के जब घर आना  ही है 
तो फिर ? वो ....घर से बाहर 
जाता ही क्यों है ?

बार -बार ये सवाल मेरे....
 दिमाग से टकराता है .....




शायद उसकी आँखों में  मगरमच्छी नमी होगी  या…. फिर .....
उसके घर में जगह की कमी होगी ....इसीलिए 
 दिनभर समय बिताकर ...शाम को लौट आता है 
घरवालों की जली -कटी सुनकर रात में ....
चुपचाप सो जाता है ...

जब-तक उसकी  जान में जान होती है 
ये क्रम अनवरत चलता  रहता है 
जिस दिन से उसकी जान बेजान होती है 

वो भूलना बंद कर देता है .....

उसकी हार या फिर खुद की  जीत पर 
घर का हर कोना गुनगुनाये 
दाल नहीं गली बराबर 
लौट के बुद्धू घर को आये ......

कैसी जीत या कैसी ये हार है ?
मेरी समझ में  ये हमेशा 
घाटे का व्यापार है .....

बाहर जाने के लिए 
दिमाग से सौ तरकीब भिड़ाते हैं ..

पर ...आखिर में .. बुद्धू ही कहलाते हैं .....






18 comments:

  1. पर आखिर में बुद्धू ही कहलाते हैं .,,,,

    बहुत उम्दा,लाजबाब प्रस्तुति,,

    Recent post: ओ प्यारी लली,

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  2. लौट के जब घर आना ही है
    तो फिर ? वो ....घर से बाहर
    जाता ही क्यों है ?

    बार -बार ये सवाल मेरे....
    दिमाग से टकराता है .....

    सीधा सच्चा शाश्वत सवाल
    सीधा

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  3. वाह बहुत सार्थक,सुंदर रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई


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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज बुधवार (29-05-2013) बुधवारीय चर्चा ---- 1259 सभी की अपने अपने रंग रूमानियत के संग .....! में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. कैसी जीत या कैसी ये हार है ?
    मेरी समझ में ये हमेशा
    घाटे का व्यापार है ....
    आपने लाख टके की एक बात कह दी

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  6. बहुत सही कहा

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  7. बिल्‍कुल सही ...

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  8. आपने दो मुहावरों को मिला कर कविता रची है .... दोनों मुहावरे अलग अलग अर्थ रखते हैं

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  9. Endless affection brought back .Nice.

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    1. sacchi bat ....sare dukh aur kushi ko khud me sametta hai ghar aur gharwaalo ka pyaar ..isliye ....unka vishwas nahi todna chahiye ....jo cheese ham dusron se chahte hain wo unhe pahle dena padta hai ,....

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  10. कैसी जीत या कैसी ये हार है ? हमारी जिंदगी में तो ऐसा अक्सर होता ही रहता है,बेहतरीन प्रस्तुति.

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  11. बहुत सुन्‍दर, उत्‍क़ष्‍ठ, बेहतरीन रचना बहुत बहुत आभार
    हिन्‍दी तकनीकी क्षेत्र की रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारियॉ प्राप्‍त करने के लिये एक बार अवश्‍य पधारें
    टिप्‍पणी के रूप में मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ साथ पर अनुसरण कर अनुग्रहित करें
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  12. बहुत ही सुंदर.

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  13. कैसी जीत या कैसी ये हार है ?
    मेरी समझ में ये हमेशा
    घाटे का व्यापार है ....,

    बहुत सुंदर,शुभकामनाये

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  14. बाहर जाने के लिए
    दिमाग से सौ तरकीब भिड़ाते हैं ..

    पर ...आखिर में .. बुद्धू ही कहलाते हैं ...
    ............बहुत सार्थक

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  15. बहुत सुंदर ! जितनी सार्थक रचना उतनी ही कलात्मक ! शुभकामनायें !
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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