Wednesday, 12 June 2013

रूत मिलन की

सागर की लहरों पर किरणें 
लेती है अंगडाई 
लिए साथ में मस्त समां 
बरखा की बूँदें आई ....

प्यासी धरा की प्यास बुझी 
हर कली खिलखिलाई ...
बागों में भौरे झूम रहे हैं ...
रूत  मिलन की है आई 

28 comments:

  1. यहाँ सावन का इंतज़ार है ..आपको बधाई !

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  2. प्यासी धरा की प्यास बुझी
    हर कली खिलखिलाई ...
    बागों में भौरे झूम रहे हैं ...
    रूत मिलन की है आई
    वर्षा ऋतू का स्वागत आपको बधाई खुबसूरत बेहतरीन

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  3. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर प्रस्तुति

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  4. बरखा ऋतू का खूबसूरत अहसास...
    बहुत सुन्दर रचना... बरखा आगमन की बधाई

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  5. बहुत सुंदर निशाजी.....कितनी खूबसूरती से बरखा रानी का स्वागत किया है ....
    साभार.....

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  6. बरखा ऋतू का सुन्दर अहसास... निशा जी

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  7. प्रेम को बारिश से भिंगोती सुंदर मनभावन रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई

    आग्रह है- पापा ---------

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  8. आपने लिखा....हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए आज 15/06/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक है http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिए एक नज़र ....
    धन्यवाद!

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  9. बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति....

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  10. बहुत सुन्दर लिख रहीं हैं आप .शोडषी के सौंदर्य सा निखार आया है रचनाओं में .ॐ शान्ति .

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  11. बहुत बढ़िया निशा जी

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  12. वाह! बहुत खुबसूरत एहसास पिरोये है अपने......

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  13. चलता रहे यह अभिसार रितुमिलन की लाए नै बहार ....

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  14. बड़े सशक्त बिम्ब संजोये हैं भाव और अर्थ की शानदार लयकारी समस्वरता .क्या कहने हैं इस भाव अभिव्यक्ति के . .ॐ शान्ति .

    आपकी टिप्पणियाँ हमारी शान हैं शुक्रिया .बेहतरीन प्रस्तुतियों के लिए मुबारक बाद और बधाई क्या बढाया .ॐ शान्ति .

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  15. बहुत सुंदर .....

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  16. बरखा की बूंदे आई सबके लिये खुशियाँ लायी.

    सुंदर गीत.

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  17. प्यासी धरा की प्यास बुझी
    हर कली खिलखिलाई ...
    बागों में भौरे झूम रहे हैं ...
    रूत मिलन की है आई
    बहुत सुंदर.सटीक.बधाई!

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  18. बरखा की मनभावन बूँदे...बहुत खुबसूरत..

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  19. बरखा की रुत हो तो साजन की प्रतीक्षा तो रहती ही है । सुंदर प्रस्तुति ।

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