Friday, 6 April 2012

तुम औ मै

तुम  औ मैं
रेल की दो समानांतर
 पटरिया हैं
जो एक दुसरे से
अलग नही हैं
आपस में जुड़े हुए हैं
विश्वास के अटूट बंधन से
 बंधन इतना मजबूत है कि
ये मुसाफिर को उसकी
मंजिल तक पहुचातें हैं .........
साथ साथ चलनेवाले
साथी कहलाते हैं ......
सुन मेरे साथी
मेरी चाहत है
तुम औ मैं
हम बनकर
जीवनपथ पर
एक साथ चलें
तेरे गम मेरे हो
मेरे गम तेरे हो
ज्यादा .....कुछ ....और ..?????? नही.......
क्या तुम मेरे साथ ......
अंतहीन दूरी तक
चलना पसंद करोगे ??????/
मैं ......तेरी ...साथी ...
तुम पर इतना  विश्वास
करती हूँ ......
क्या तुम ??///

मेरे विश्वास कि लाज रखोगे ?

60 comments:

  1. जिंदगी की रेल की और पटरियों पहियों की खूबसूरत व्याख्या.. वाह बहुत खूब

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  2. मैं ......तेरी ...साथी ...
    तुम पर इतना विश्वास
    करती हूँ ......
    क्या तुम ??///

    .....सही कह रही हैं आप्
    किसकी बात करें-आपकी प्रस्‍तुति की या आपकी रचनाओं की। सब ही तो आनन्‍ददायक हैं प्रभावशाली रचना है !!

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    1. thanks sanjay jee......manobal badhane ke liye..

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  3. तुम औ मैं के अटूट बंधन. .. अति सुन्दर |

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  4. आपसी विश्वास और प्यार पर ही साहचर्य टिका हुआ है!...बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

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  5. क्या तुम मेरे साथ ......
    अंतहीन दूरी तक
    चलना पसंद करोगे ??????/
    मैं ......तेरी ...साथी ...
    तुम पर इतना विश्वास
    करती हूँ ......
    क्या तुम ??///

    मेरे विश्वास कि लाज रखोगे ?.... इससे अधिक चाहिए भी क्या , बहुत सुन्दर

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  6. रेल की पटरियों पर बहुत सुंदर कविता ....
    रेल की पटरियों जैसी ...जो यात्रियों की यात्रा सुखद करती है ....
    शुभकामनायें ...

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  7. जब अपनाने को तैयार है उसके गम भी..............
    तो क्यूँ ना देगा वो साथ.................

    सुन्दर भाव निशा जी.

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    1. thaku anu jee aapke aagmanka mai besabri se intjar karti hoon.

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    2. और हमें इन्तज़ार रहता है आपकी रचनाओं का....
      :-)

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    3. anu jee murga bola hai ka word verification hat gaya.

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  8. 'तुम' और 'मैं' के बीच 'वो' भी तो होना चाहिए एकमदम से नहीं???

    यह मज़ाक था...बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति

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  9. वाह, सुंदर!... आज समझ में आया कि मुहावरा- पटरी बैठना का क्या मतलब है!

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  10. वाह ……………शानदार प्रस्तुति

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  11. भावनात्मक प्रस्तुति .... बहुत अच्छी लगी ॥

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  12. मैं ......तेरी ...साथी ...
    तुम पर इतना विश्वास
    करती हूँ ......
    क्या तुम ??///

    मेरे विश्वास कि लाज रखोगे ?
    आध्यात्मिक जुड़ाव ,आशा और आश्था के फलक पर खड़ी है यह रचना .सुन्दर अति सुन्दर प्रस्तुति विशवास जगाती प्रेम में .यकीन पैदा करती खुद में .

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  13. क्या तुम मेरे साथ ...
    अंतहीन दूरी तक
    चलना पसंद करोगे ??????
    एक अटूट रिश्ते की बुनियाद इसी भरोसे पर ही तो है, सुख हो या दुःख... सदा एक-दुसरे का साथ निभाने का भरोसा

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  14. ma'm prashn to hamesha rah hi jaate hain....par kyun....???

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    1. kyun ki aape hath me jo hai use aap nibhaengi pr
      samnewale se aap jabardasti to apne man ki nahi krwa payengi n aapke man ka ho iske liye prayas krna padta hai. jaruri nahi ki ham safal ho par asha to kar hi sakte hain asha jee....baki bhagwan ki marjee...

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  15. रेल की पटरियों जैसी ज़िन्दगी हो तो सफर आसान हो जाता है, मंजिल एक होती है और दिशा निर्धारित।

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  16. बहुत ही भावमय होकर लिखतीं हैं आप.
    पढ़कर भावविभोर हो उठता है मन.
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार,निशा जी.

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    1. thanku rakesh jee ....aapke comment"s se mera manobal badhta hai idhar aap bahut dinon se nahi likh rahe hain ? ab aapki tabiyat kaisi hai ?

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    2. मेरी तबियत अब ठीक है निशा जी.कुछ व्यस्तता के कारण लिख नहीं पा रहा हूँ.शीघ्र ही कोशिश करूँगा.आपकी भी कुछ पोस्ट कमेन्ट करने से रह गयीं हैं.

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  17. वाह!!!!!!बहुत सुंदर रचना,अच्छी प्रस्तुति........

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....

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  18. "मैं ......तेरी ...साथी ...
    तुम पर इतना विश्वास
    करती हूँ ......
    क्या तुम ??///
    मेरे विश्वास कि लाज रखोगे ?"

    गहरे भाव... सुन्दर रचना . बधाई.

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  19. मैं ......तेरी ...साथी ...
    तुम पर इतना विश्वास
    करती हूँ ......
    क्या तुम ??///
    मेरे विश्वास कि लाज रखोगे ?"
    ...एक बहुत विश्वास भरा सवाल ...जिसका जवाब आप जानती हैं...सुन्दर निशाजी

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  20. सुन्दर रचना!!

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  21. तेरे गम मेरे हो
    मेरे गम तेरे हो
    ज्यादा .....कुछ ....और ..?????? नही.......
    क्या तुम मेरे साथ ......
    अंतहीन दूरी तक
    चलना पसंद करोगे ??????/

    वाह वाह वाह...बेजोड़ रचना...बधाई

    नीरज

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  22. आपके हाथ में केवल अपनी मंज़िल तय करना है। उसकी वो जाने।

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    1. sahi bat hai...har insan apne apne karmon ke liye jimmedar hai par kai bar kisi ki vajah se koi aur bhi to pareshan ho jata hai isliye talmel baithana jaruri ho jata haho jata hai....galat to nahi kah rahi hoo main????

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  23. मनोभावों की अच्छी प्रस्तुति।

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  24. पटरियां यूं ही साथ चलती रहती अहिं और अनंत पे मिल भी जाती हैं ... जहां दूसरा कोई नहीं होता ... बस मैं से हम ही रह जाता है ...

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  25. निशा जी इस विश्वास के सहारे ही जिन्दगी आगे बढ़ती है...बहुत सुन्दर..

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  26. har kadam pe sath sath..:-)

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  27. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से शुभकामनाएँ।

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  28. आशा बनी रहे ...
    शुभकामनाएँ।

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  29. समानांतर पटरियों के बीच की अपेक्षाओं को व्यक्त करती सुंदर कविता.

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  30. अच्छी प्रस्तुति के लिये बहुत बहुत बधाई....

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  31. यह विश्वास ही जीवन की शक्ति है...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  32. विश्वास एक पक्षीय प्रक्रिया नहीं है।
    अच्छी अभिव्यक्ति।
    सुन्दर रचना।

    आनन्द विश्वास

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  33. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना !

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  34. अटूट विश्वास को जरुर प्रतिसाद मिलता है !

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  35. सब कुछ पटरी पर ही रहे तभी मज़ा है जिंदगी का.

    सुंदर प्रस्तुति.

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  36. bahut badiya likha hai, ye zindgi sach me rel ki patri hi to hai, do saathi ek raasta. very nice !

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    Thanks

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  37. साथ होना ही बड़ी बात है...एक अहसास है कोई साथ तो है...भले ही कुछ दूर...

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  38. behad bhawpoorn rachna hai.....bahut achchi lagi.

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  39. "तुम औ मैं
    हम बनकर
    जीवनपथ पर
    एक साथ चलें
    तेरे गम मेरे हो
    मेरे गम तेरे हो
    ज्यादा .....कुछ ....और ..?????? नही......."
    बहुत सुंदर ! बधाई निशा जी !

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