Friday, 19 June 2015

खामोश नजर




जीवन के इक मोड पर
अच्छा हुआ तुम मिल गये
कुछ कह लिया
कुछ सुन लिया
बोझ हल्का कर लिया
यूँ ही साथ चलते चलते
कुछ रास्ता भी कट गया
पहचान क्या है मेरी
पहचान क्या है तेरी
तुम खुद ही गढो
जानना ही चाहते हो
तो मेरी आँखों में  पढो। 
जा  के मिलूँ समन्दर में पर
मैं  इक कालिन्दी हूँ
और  मर्यादा के सीमाओं में बँधी हूँ
भावनाओं को व्यक्त करना ही
प्यार नही होता
कुछ पाने के लिये कुछ देना भी
प्यार नही होता
प्यार भरे दिलों में
मिलने की बेकरारी होती है
एक खामोश नजर
प्यार के अनगिनत शब्दों पर
भारी होता है
प्यार कैसा है तेरा
प्यार कैसा है मेरा
बिना समझे ही बढो
सामझना ही चाहते हो तो
मेरी आँखों में पढो।

 तेरी यादों की परछाई में
दिन रात भटकती रहती हूँ
सोते जगते उठते बैठते
बस यही दुआ किया करती हूँ
मिले तुम्हे सफलता हर पल
खुशियाँ कदमपोशी करे
जगह जगह खिल जाये कलियाँ
जहाँ जहाँ तेरे कदम पडे
प्यार कैसा है तेरा
प्यार कैसा है मेरा
बिना परखे ही बढो
परखना ही चाहते हो तो
मेरी आँखों में पढो।      
                             ये भी बहुत पुरानी रचना है।  

13 comments:

  1. Purani rachana purani sharab ki tarah hoti hai.
    Nisha ki purani rachana ka alag hi nasha!

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  2. Purani rachana purani sharab ki tarah hoti hai.
    Nisha ki purani rachana ka alag hi nasha!

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  3. बहुत बहुत धन्यवाद सर .....नेट के जाल में उलझ कर मेरी सृजनशीलता खो गई है बहुत हो गया ..अब उसकी मनमानी को इस बार अलविदा कर दूंगी ......ताकि नई रचनाओं का सृजन कर सकूँ ....

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  4. आपकी इस पोस्ट को शनिवार, २० जून, २०१५ की बुलेटिन - "प्यार, साथ और अपनापन" में स्थान दिया गया है। कृपया बुलेटिन पर पधार कर अपनी टिप्पणी प्रदान करें। सादर....आभार और धन्यवाद। जय हो - मंगलमय हो - हर हर महादेव।

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  5. बहुत ही सुन्दर प्रेमपूर्ण , भावपूर्ण रचना...
    :-)

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  6. भावनाओं को व्यक्त करना ही
    प्यार नही होता
    कुछ पाने के लिये कुछ देना भी
    प्यार नही होता
    प्यार भरे दिलों में
    मिलने की बेकरारी होती है
    एक खामोश नजर
    प्यार के अनगिनत शब्दों पर
    भारी होता है

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  7. बहुत जी सुन्दर अभिव्यक्ति एक दिल की जो की प्यार से भरा हुआ है, परन्तु जिसके लिए यह प्यार है वह ही दूर है, लेकिंग दूर हो कर भी हर पल पास है. यह एक ऐसा प्यार है जो सामाजिक बंधनो से बनधा हुआ है परन्तु फिर भी प्यार न्योछावर कर रहे है, बिरला यह प्यार होता है . समाज की दूसरी और का दिल भी इस प्यार को समझता है लेकिन बेबस है कुछ व्यक्त नहीं कर सकता पर प्यार वहां से भी भरपूर है.

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  8. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (21-06-2015) को "योगसाधना-तन, मन, आत्मा का शोधन" {चर्चा - 2013} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    अन्तर्राष्ट्रीय योगदिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  9. बहुत सुन्दर
    उम्दा प्रस्तुति..... वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

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  10. बहुत बढ़िया

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