Sunday, 7 September 2014

औरों को झुकाना चाहे पर

औरों को झुकाना चाहे पर 
खुद झुकना मंजूर नहीं 
खोखले दावे हैं  अहम् के 
ये कतई ग़ुरूर नहीं,,,,,,,

15 comments:

  1. काश !यह बात धर्म को लेकर लड़ रहे लोगों को समझ मे आती !
    जन्नत में जल प्रलय !

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  2. बेहतरीन अभिवयक्ति.....

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  3. बहुत सुन्दर है खोखले दावे हैं एहम के एकटे गुरूर नहीं यथार्थ है अतिश्योक्ति नहीं है .

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  4. हाय ! ये हुश्न की कारीगरी औ इश्क की बाजीगरी
    जख्म सारे सिल गए आगोश में आने के बाद

    जिस्म की मंजिल पे कुछ यूं फिसल जाने के बाद। …

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  5. अच्छी भावपूर्ण रचना !
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

    राज चौहान
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

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  6. अच्छी पंक्तियां हैं।

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  7. बेहतरीन प्रस्तुति मधुजी अनिल

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  8. बेहतरीन प्रस्तुति '

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  9. सत्य है , मंगलकामनाएं आपको !!

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  10. वाह ... क्या बात है ...

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