Tuesday, 21 January 2014

ख़ामोशी




आलम था ख़ामोशी का 
दिल दहल गया.……                    इतनी मिली खामोशियाँ कि 
मन बहल गया..... 

ख़ामोशी की ख़ामोशी से 

बात हुई --- बड़ी लम्बी सी.--- 
छोटी मुलाकात हुई ----   


                                                               


















निशा की  निस्तब्धता 
नभ की ख़ामोशी 
चाँद तारों की बस्ती में 
  ग़ज़ब की खुमारी है. 



सर्द मौसम की  आहट 
ख़ामोशी की  सुगबुगाहट 
ताकत को तौलती है 
दिल भारी और लब बंद है 
सिर्फ आँखें हीं बोलती है.


13 comments:

  1. सिर्फ आँखें हीं बोलती है.…

    बहुत सुंदर ....

    ReplyDelete
  2. इन खामोशियों कि जुबान को आँखे तोड़ती है..
    बहुत सुन्दर रचना...
    http://mauryareena.blogspot.in/

    ReplyDelete
  3. दिल भारी और लब बंद है
    सिर्फ आँखें हीं बोलती है.…
    ..........उत्कृष्ट भाव संयोजन से सजी बेहतरीन भावाभिव्यक्ति..बहुत अच्‍छा लि‍खा है दी

    ReplyDelete
  4. गहन सुंदर भाव ....बहुत अच्छी लगी रचना ...!!

    ReplyDelete
  5. वाह...बहुत ही सुन्दर....

    सस्नेह
    अनु

    ReplyDelete
  6. इतनी मिली खामोशियाँ कि
    मन बहल गया.....
    ....वाह...बहुत ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  7. सुंदर भाव ..खुबसूरत पंक्तियाँ.....

    ReplyDelete
  8. खामोशियों को उनकी ही जबानी लिख दिया ... खामोशी से ...

    ReplyDelete
  9. गहन एवं सुंदर अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  10. खामुशी को खामुशी से बात करने दो... बहुत सुन्दर अन्दाज़!!

    ReplyDelete

  11. वाह !! बहुत सुंदर
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई ----

    आग्रह है--
    वाह !! बसंत--------

    ReplyDelete
  12. बढ़िया अभिव्यक्ति , आभार !

    ReplyDelete
  13. सुन्दर मनोहर गागर में सागर सा

    ReplyDelete