Monday, 21 May 2012

अगला मोड़

तुम्हें सूरज  की किरणें चाहिए 
मुझे चंदा की चांदनी ..........
तुम टकसाल  के प्रहरी हो ??????
मैं वीणा की रागिनी
 मानव-मन की विषमताओं को
जान सका न कोय ??????
राहें जुदा-जुदा है अपनी
कैसे मिलना होय???????
मिलना ही है गर तुमको तो?????
भगीरथ सा प्रयास करना होगा
राह बदलकर राही तुमको
अगले मोड पर -----
मिलना होगा
मेरा क्या है़------
बनकर बदली कहीं भी
बरस जाऊगी----
राह तुम तकते रहोगे-----
नज़र नहीं कहीं आउँगी
बनकर यादें मानसपटल पर
जीवनभर तडपाऊँगी------- 



ब्लागर साथियों आवश्यक कार्य की वजह से १५ दिन तक ब्लाँग जगत से दूर रहूँगी----------

43 comments:

  1. मेरा क्या है़------
    बनकर बदली कहीं भी
    बरस जाऊगी----

    सुंदर भाव ...शुभयात्रा निशा जी ....!!

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  2. मिलना ही है गर तुमको तो,
    भगीरथ सा प्रयास करना होगा
    धारा का क्या है, जो लगाव से उतार ले, उधर बह चलेगी... अच्छी रचना है
    सादर

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  3. आमंत्रित सादर करे, मित्रों चर्चा मंच |

    करे निवेदन आपसे, समय दीजिये रंच ||

    --

    बुधवारीय चर्चा मंच |

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  4. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से आभार।

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  5. मेरा क्या है़------
    बनकर बदली कहीं भी
    बरस जाऊगी-.........बहुत सुन्दर रचना..

    ...शुभयात्रा निशा जी

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  6. इतनी खूबसूरत रचना देकर अनुपस्थिति स्वीकार्य है ... जल्दी लौटिये

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  7. ब्लॉग्गिंग से ज्यादा क्या जरूरी है????
    :-)
    have a nice time....

    regards
    anu
    ps- very nice poem.

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति, वाह क्या बात है
    (अरुन = arunsblog.in)

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  9. राह तुम तकते रहोगे-----
    नज़र नहीं कहीं आउँगी
    बनकर यादें मानसपटल पर
    जीवनभर तडपाऊँगी-------

    वाह ,,,, बहुत ही अच्छी रचना,....

    RECENT POST काव्यान्जलि ...: किताबें,कुछ कहना चाहती है,....

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  10. BAHUT ACHCHHI RACHNA HAI AAPKI...BADHAI

    NEERAJ

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  12. धरती आसमान का मिलन संभव नहीं पर किसी न किसी छोर पे वो भी मिलते ही है ... अच्छा लिखा है ...

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  13. bahut pyari si prastuti........

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  14. राहें जुदा-जुदा है अपनी
    कैसे मिलना होय,,,

    प्रेम मिलन के लिए तो आँखें ही काफी हैं .....

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  15. राहें जुदा-जुदा है अपनी
    कैसे मिलना होय,,,

    प्रेम मिलन के लिए तो आँखें ही काफी हैं .....

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  16. ham sabhi intjaar karnge apke lautne ka...behtreen abhivaykti....

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  17. अगले मोड़ पर प्रतीक्षारत होगा कोई

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  18. मन के भावों को उकेरती हुई सुन्दर रचना ...बहुत खूब

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  19. वाह ...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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  20. मेरा क्या है़------
    बनकर बदली कहीं भी
    बरस जाऊगी----

    जल वाष्प बन उड़ जाऊंगी ,हवा के संग गाऊंगी ...अच्छी रचना है
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai
    मंगलवार, 22 मई 2012
    :रेड मीट और मख्खन डट के खाओ अल्जाइ -मर्स का जोखिम बढ़ाओ
    http://veerubhai1947.blogspot.in/
    और यहाँ भी -
    स्वागत बिधान बरुआ :आमंत्रित करता है लोकमान्य तिलक महापालिका सर्व -साधारण रुग्णालय शीयन ,मुंबई ,बिधान बरुआ साहब को जो अपनी सेक्स चेंज सर्जरी के लिए पैसे की तंगी से जूझ रहें हैं .
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

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  21. अगले मोड़ का महत्व है. उसी में जीवन छिपा है. सुंदर रचना.

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  22. बहुत सुन्दर रचना, बधाई.

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  23. सुंदर रचना.

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  24. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

    ReplyDelete
  25. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

    ReplyDelete
  26. मेरा क्या है़
    बनकर बदली कहीं भी
    बरस जाऊगी
    राह तुम तकते रहोगे
    नजर नहीं कहीं आउँगी
    बनकर यादें मानसपटल पर
    जीवनभर तडपाऊँगी

    कितनी सुंदर कविता लिखी है आपने, वाह।

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  27. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    हैल्थ इज वैल्थ
    पर पधारेँ।

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  28. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  29. Very nice post.....
    Aabhar!
    Mere blog pr padhare.

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  30. सुंदर अभिव्यक्ति।

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  31. वाह बहुत खूब

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  32. मेरा क्या है़------
    बनकर बदली कहीं भी
    बरस जाऊगी----
    राह तुम तकते रहोगे-----
    नज़र नहीं कहीं आउँगी
    बनकर यादें मानसपटल पर
    जीवनभर तडपाऊँगी-------

    वाह, बहुत खूब.रचना मन को छू गई.

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  33. मेरा क्या है़------
    बनकर बदली कहीं भी
    बरस जाऊगी----
    राह तुम तकते रहोगे-----
    नज़र नहीं कहीं आउँगी
    बनकर यादें मानसपटल पर
    जीवनभर तडपाऊँगी-------

    स्वागतम स्वागतम बाद अल्पविराम आपका ब्लॉग पर .
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    फिरंगी संस्कृति का रोग है यह
    प्रजनन अंगों को लगने वाला एक संक्रामक यौन रोग होता है सूजाक .इस यौन रोग गान' रिया(Gonorrhoea) से संक्रमित व्यक्ति से यौन संपर्क स्थापित करने वाले व्यक्ति को भी यह रोग लग जाता है .
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

    ram ram bhai
    शुक्रवार, 8 जून 2012
    जादू समुद्री खरपतवार क़ा
    बृहस्पतिवार, 7 जून 2012
    कल का ग्रीन फ्यूल होगी समुद्री शैवाल
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

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  34. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  35. बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति.
    आपका ब्लॉग जब यहाँ हैं तो आप दूर कैसे हो पाएंगीं.
    अभी तो बहुत सी पोस्ट हैं आपकी, हमारे पढ़ने के लिए.

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  36. I read your post interesting and informative. I am doing research on bloggers who use effectively blog for disseminate information.My Thesis titled as "Study on Blogging Pattern Of Selected Bloggers(Indians)".I glad if u wish to participate in my research.Please contact me through mail. Thank you.

    http://priyarajan-naga.blogspot.in/2012/06/study-on-blogging-pattern-of-selected.html

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