Friday, 11 November 2011

कैसे कहूँ ?


आदर्श,मर्यादा,समर्पण,ईमानदारी औ
नित नये-नये प्रयोग की ज़मीं पे
मन मेरा है जीता
यही मेरा जीवन है औ
यही है गीता।
इन मूल्यों को अपनाकर
क्या-क्या मैने पाया
पाने के क्रम में
कैसे कहूँ ?
क्या-क्या मैने खोया।
खोने के गहरे ज़ख्मों को
कैसे ? किसको ? दिखलाऊँ
इन रिस्ते ज़ख्मों पर कैसे?
मरहम मैं लगवाऊँ ?
नैनों को हँसते सबने देखा
दिल की पीडा किसने जानी ?
सदियों से चली आ रही
खोने औ पाने की ये करुण कहानी।
छोटी-छोटी इन बातों से
अमावस की काली रातों से
ना घबराना प्यारे तुम
हमेशा याद रखना
दुःख के गहन अंधेरों में
द्विविधा की बोझिल पहरों में
हर इंसान हमेशा अकेला हीं
खडा रहता है
इन बाधाओं को पार कर जो
अपना परचम लहराता है
आनेवाले पल का वही
सिकन्दर कहलाता है
वही सिकन्दर कहलाता है।

41 comments:

  1. जीवन में जो बाधाओं से लड़ता है, सफलता भी उसे ही मिलती है। जो बौरा डूबन डरा रहा किनारे बैठ।

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  2. इन मूल्यों को अपनाकर
    क्या-क्या मैने पाया
    पाने के क्रम में
    कैसे कहूँ ?
    क्या-क्या मैने खोया।

    पर बाधाओं से लड़ जो जीता वही सिकंदर है ..अच्छी प्रस्तुति

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  3. दुःख के अँधेरे में प्रेरणा के बीज छुपे होते हैं!

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  4. प्रेरित करती और प्रभावशाली रचना.....

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  5. सच है बाधाओं का सामना करके ही सफलता और जीत पाई जा सकती है..... सकारात्मक सन्देश देती रचना

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  6. आदर्श,मर्यादा,समर्पण,ईमानदारी औ
    नित नये-नये प्रयोग की ज़मीं पे
    मन मेरा है जीता
    यही मेरा जीवन है औ
    यही है गीता।
    इन मूल्यों को अपनाकर
    क्या-क्या मैने पाया
    पाने के क्रम में
    कैसे कहूँ ?
    क्या-क्या मैने खोया।
    खोने के गहरे ज़ख्मों को
    कैसे ? किसको ? दिखलाऊँ....bahut kuch kahte shabd

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  7. jo jita hai wahi sikandar hai...

    behtreen rschna..
    padhane ke liye dhanywaad.
    jai hind jai bharat

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  8. आदर्श,मर्यादा,समर्पण,ईमानदारी औ
    नित नये-नये प्रयोग की ज़मीं पे
    मन मेरा है जीता
    यही मेरा जीवन है औ
    यही है गीता।

    ....बहुत सच कहा है...इन आदर्शों का पालन करने वाले को सिकंदर बनने से कौन रोक सकता है...मन को छूते गहरे अहसास..बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..

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  9. sach kaha
    aaj bhi jo jeeta wahi sikander.....

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  10. सच कहा है आपने ... जो बाधाओं को पार पाता है सिकंदर तो वही होता है ... लाजवाब लिखा है ...

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  11. हमेशा याद रखना
    दुःख के गहन अंधेरों में
    द्विविधा की बोझिल पहरों में
    हर इंसान हमेशा अकेला हीं
    खडा रहता है
    इन बाधाओं को पार कर जो
    अपना परचम लहराता है
    आनेवाले पल का वही
    सिकन्दर कहलाता है

    prerak prastuti.

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  12. इन मूल्यों को अपनाकर
    क्या-क्या मैने पाया
    पाने के क्रम में
    कैसे कहूँ ?
    क्या-क्या मैने खोया।

    इन बाधाओं को पार कर जो
    अपना परचम लहराता है
    आनेवाले पल का वही
    सिकन्दर कहलाता है

    very meaningful lines.

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  13. बहुत सुन्दर निशा जी....बेहतरीन पेशकश.

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  14. छोटी-छोटी इन बातों से
    अमावस की काली रातों से
    ना घबराना प्यारे तुम
    हमेशा याद रखना
    दुःख के गहन अंधेरों में
    द्विविधा की बोझिल पहरों में
    हर इंसान हमेशा अकेला हीं
    खडा रहता है
    इन बाधाओं को पार कर जो
    अपना परचम लहराता है
    आनेवाले पल का वही
    सिकन्दर कहलाता है
    वही सिकन्दर कहलाता है।

    बहुत सुन्दर और प्रेरक रचना. बांटने के लिए शुक्रिया.

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  15. बहुत सुन्दर और प्रेरक रचना....

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  16. बहुत ही उम्दा कविता निशा जी नमस्ते

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  17. आपका पोस्ट अच्छा लगा । .मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  18. जीवन का कटु सत्य बखूबी व्यक्त किया है

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  19. सकारात्मक भावों को बहुत अच्छे से लिखा है आपने,बधाई !

    अपने महत्त्वपूर्ण विचारों से अवगत कराएँ ।

    औचित्यहीन होती मीडिया और दिशाहीन होती पत्रकारिता

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  20. बहुत अच्छा लिखा आपने !
    इसके लिए आपको बहुत बहुत बधाई !
    अब आपके ब्लॉग पर आना होता रहगा
    मेरे ब्लॉग पर आये
    manojbijnori12 .blogspot .com

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  21. "पाने के क्रम में
    कैसे कहूँ ?
    क्या-क्या मैने खोया।
    खोने के गहरे ज़ख्मों को
    कैसे ? किसको ? दिखलाऊँ
    इन रिस्ते ज़ख्मों पर कैसे?
    मरहम मैं लगवाऊँ ?"

    संवेदना से सराबोर अभिव्यक्ति !बस अपनी ही सी लगती कहानी ! बधाई इस सुंदर प्रस्तुति के लिये ।

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  22. इन बाधाओं को पार कर जो
    अपना परचम लहराता है
    आनेवाले पल का वही
    सिकन्दर कहलाता है

    sach kaha aapne aur khoobsurat tareeke se

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  23. जीवन से न हार जीने वाले ... प्रेरक कविता।

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  24. अति सुन्दर अभिव्यक्ति, मानव मन
    के धरातल पर लिखी हुई कविता.
    अच्छा एवं सफल प्रयास.
    धन्यवाद.
    आनन्द विश्वास.

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  25. ब्लॉग का नाम हिंदी में अनुदित कर दिया जाय तो अच्छा नहीं रहेगा..?

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  26. akele hi aage badhna hai ...himmat se...

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  27. दुःख के गहन अंधेरों में
    द्विविधा की बोझिल पहरों में
    हर इंसान हमेशा अकेला हीं
    खडा रहता है

    जीवन के एक बड़े यथार्थ को आपने बहुत सुंदर तरीके से शब्दबद्ध किया है।

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  28. नमस्कार
    सम्मानित मित्र

    आज आपके ब्लॉग पर गया हूँ! आपकी रचनायें पढने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, इसके लिए आपको ह्रदय से धन्यवाद!

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  29. अच्छी पोस्ट आभार ! मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद।

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  30. बेहद ख़ूबसूरत और शानदार रचना लिखा है आपने! दिल को छू गई हर एक पंक्तियाँ!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com

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  31. Kitti sundar bat likhi apne..badhai.

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  32. इन बाधाओं को पार कर जो
    अपना परचम लहराता है
    आनेवाले पल का वही
    सिकन्दर कहलाता है
    वही सिकन्दर कहलाता है।

    वाह! बहुत सुन्दर प्रेरणादायक प्रस्तुति है आपकी.
    सिकंदर भी क्या खूब नाम है.

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  33. अमावस की काली रातों से
    ना घबराना प्यारे तुम
    हमेशा याद रखना
    दुःख के गहन अंधेरों में
    द्विविधा की बोझिल पहरों में
    हर इंसान हमेशा अकेला हीं
    खडा रहता है
    सुन्दर भाव रचना मन भाई इससे पहली रचना भी मन को बंधती है दोनों रचनाएं अति सुन्दर .

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