Friday, 4 November 2011

सच कहूँ ?

तुम्हारी एक खामोश नज़र ने 
मुझे दिखा दिये
तुम्हारे बरसों से धारण किये हुये
धेर्य को 
तुम्हारी प्रतीक्षा करने की शक्ति को 
सलाम है तुम्हारी इस भक्ति को
जिसने पत्थर को पिघला दिया 
जो दिन मुझे नही देखना था
वो दिन भी दिखला दिया
जो सहन नहीं कर सकती थी
उसे सहना सिखा दिया
जो बहना मुश्किल था
उसे निर्झर बना बहा दिया़ 
अनवरत अहर्निश,सच कहूँ ?
लिखे गये ये शब्द , मेरी उक्ति नही 
बल्कि तेरी ही अभिव्यक्ति है
महसुस  हो गया है 
मुझे कि प्यार में कितना दम होता है
कितना भी व्यक्त करो ये हमेशा कम होता है।

32 comments:

  1. bahut hi shandaar rachna...
    bhakti me hi shakti hoti hai..
    jai hind jai bharat

    ReplyDelete
  2. जो दिन मुझे नही देखना था
    वो दिन भी दिखला दिया
    जो सहन नहीं कर सकती थी
    उसे सहना सिखा दिया
    जो बहना मुश्किल था
    उसे निर्झर बना बहा दिया़ ... yahi to jivan ka jadu hai

    ReplyDelete
  3. यह सहन शक्ति एक दिन रंग ज़रूर लायेगी।

    ReplyDelete
  4. लिखे गये ये शब्द , मेरी उक्ति नही
    बल्कि तेरी ही अभिव्यक्ति है
    महसुस हो गया है
    मुझे कि प्यार में कितना दम होता है
    कितना भी व्यक्त करो ये हमेशा कम होता है।

    यह पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगीं।

    सादर

    ReplyDelete
  5. महसुस हो गया है
    मुझे कि प्यार में कितना दम होता है
    कितना भी व्यक्त करो ये हमेशा कम होता है।

    बहुत सुन्दर एहसास .. धैर्य सब कुछ सिखा देता है .

    ReplyDelete
  6. महसुस हो गया है
    मुझे कि प्यार में कितना दम होता है
    कितना भी व्यक्त करो ये हमेशा कम होता है।

    Bahut Sunder

    ReplyDelete
  7. तुम्हारी एक खामोश नज़र ने
    मुझे दिखा दिये..... सुन्दर अभिवयक्ति....

    ReplyDelete
  8. मुझे कि प्यार में कितना दम होता है
    कितना भी व्यक्त करो ये हमेशा कम होता है।....

    Very true !

    .

    ReplyDelete
  9. बहुत अच्छी रचना !

    ReplyDelete
  10. pyar ki shakti ko bahut komalta se likha hai, badhai.

    ReplyDelete
  11. मुझे कि प्यार में कितना दम होता है
    कितना भी व्यक्त करो ये हमेशा कम होता है।

    प्यार की शक्ति का सुंदर अहसास.

    बदिया प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  12. महसुस हो गया है
    मुझे कि प्यार में कितना दम होता है
    कितना भी व्यक्त करो ये हमेशा कम होता है।
    सुंदर!

    ReplyDelete
  13. गहरे भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने! बधाई!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/

    ReplyDelete
  14. सच मुच
    महसुस हो गया है
    मुझे कि प्यार में कितना दम होता है
    कितना भी व्यक्त करो ये हमेशा कम होता है।

    ReplyDelete
  15. निशा जी, बहुत अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर...कई रचनाएं देखीं, दिल को छू गईं...बधाई

    ReplyDelete
  16. अंतिम दो पंक्तियाँ अच्छी लगीं।

    ReplyDelete
  17. "लिखे गये ये शब्द , मेरी उक्ति नही
    बल्कि तेरी ही अभिव्यक्ति है
    महसुस हो गया है
    मुझे कि प्यार में कितना दम होता है
    कितना भी व्यक्त करो ये हमेशा कम होता है।"

    अति सुंदर!

    ReplyDelete
  18. सुन्दर अभिव्यक्ति.

    ReplyDelete
  19. बहुत बहुत अच्छा लिखा है मैम आपने।

    ReplyDelete
  20. महसुस हो गया है
    मुझे कि प्यार में कितना दम होता है
    कितना भी व्यक्त करो ये हमेशा कम होता है।

    waha bahut khub........sach kaha

    ReplyDelete
  21. वाह वाह.. अंतिम पंक्तियाँ तो बेहतरीन है!
    कितना भी व्यक्त करो ये हमेशा कम होता है।

    आभार

    ReplyDelete
  22. महसुस हो गया है
    मुझे कि प्यार में कितना दम होता है
    कितना भी व्यक्त करो ये हमेशा कम होता है।

    ...बहुत सुन्दर प्रस्तुति॥

    ReplyDelete
  23. बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

    ReplyDelete
  24. तुम्हारी एक खामोश नज़र ने
    मुझे दिखा दिये
    तुम्हारे बरसों से धारण किये हुये.... सुन्दर भावाभिवय्क्ति....

    ReplyDelete
  25. निशा जी नमस्कार, प्यार मे कितना दम होता है------बहुत खूब्।

    ReplyDelete
  26. very nice poem..
    i'm happy to join ur blog...

    ReplyDelete
  27. अनवरत अहर्निश,सच कहूँ ?
    लिखे गये ये शब्द , मेरी उक्ति नही
    बल्कि तेरी ही अभिव्यक्ति है

    आपकी सशक्त रचना दिल को छूती है.
    बहुत सही और सच कहा है आपने.

    ReplyDelete