Friday, 13 May 2011

घर


छोटा सा इक घर हो
प्यारा सा परिवार
परम-आनंद की ज्योती हो
न हो वहाँ आग
प्यार सिर्फ प्यार का
जलता रहे चिराग।

2 comments:

  1. aapki kavitayen bahut suljhi aur ek ek chor tak pahuncha dene wali hoti lhain.... acchi hai....

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