Saturday, 7 May 2011

अलविदा

जीवन पथ पर चलते चलते कौन कहाँ मिल जायेंगे
दिल के भावों को जगा कर
पुनः कहीं छिप जायेंगे
मिलन विरह की अमिट कहानी
सुन लो आलिरानी
पल पल छन छन
याद आयेंगी
बीती हुई कहानी
 फलीभूत हो सच्ची साधना
और उपासना तेरी
मंजिलकेंद्र मिल तुमको
यही शुभकामना मेरी
जीवन के उस दिवा निशा में
यादों के स्वर्णिम स्वर्गों में करना ना
मुझे जुदा अलविदा अलविदा अलविदा

4 comments:

  1. विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    कल 07/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. वाह ...बहुत बढि़या ।

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  3. बढ़िया अभिव्यक्ति...
    सादर...

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