Monday, 3 July 2017

डोलिया में उठाये के कहार

डोलिया में उठाये के कहार 
ले चल किसी विधि मुझे उस पार 
जहाँ निराशा की ओट में 
आशा का सबेरा हो 
तम संग मचलता उजालों का घेरा हो 
जहाँ मतलबी नहीं अपनों का बसेरा हो 
साझा हो हर गम न तेरा न मेरा हो 
जहाँ बचपन की मस्ती लेती हो अंगराई 
उत्साह-उमंगों संग बहे पुरवाई 
जहाँ अपने ही दम पे जुगनी झिलमिलाती 
छोटी छोटी बातों पे निशा खिलखिलाती 
मुँह -मांगी दूँगी तुमको उतराई 
तहेदिल से दूंगी तुम्हे जीत की बधाई 
खुशियों से दमकेगा प्यारा वो संसार 
ले चल किसी विधि मुझे उस पार----
ब्लॉगर साथियों एक बार फिर --नयी शुरुआत 
आप के ब्लॉग पर भी आती हूँ ---आप भी समय निकल कर आएं --
मेरे सपनों की  अगली कड़ी के रूप  निकले मेरे दिल के --- उदगार इस रूप में।   

16 comments:

  1. मुनव्वर राना साहब का एक शेर है..
    रो रहे थे सब, तो मैं भी फूट कर रोने लगा
    वरना मुझको बेटियों की रुखसती अच्छी लगी!
    एक भावपूर्ण रचना!!

    ReplyDelete
  2. भावपूर्ण, सुन्दर रचना। स्वागत व शुभकामनाएं निशा जी....

    ReplyDelete
  3. भावपूर्ण, सुन्दर रचना। स्वागत व शुभकामनाएं निशा जी....

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर .यूँ ही खिलखिलाती रहें

    ReplyDelete
  5. अपने मिलेंगे हर जगह बस तलाश ज़रूरी है ...
    आपका ब्लॉग पे आना सुखद लगा ..

    ReplyDelete
  6. बेहतरीन क्लासिक रचना , मंगलकामनाएं आपकी कलम को

    ReplyDelete
  7. बहुत सुन्दर रचना ...

    ReplyDelete
  8. A poem packed with emotions.... only someone blessed with a daughter can compose such a beauty!

    ReplyDelete
  9. बहुत ही सुंदर भाव .... शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  10. दीपोत्सव की अनंत मंगलकामनाएं !!

    ReplyDelete
  11. बहुत अच्छा लेख है Movie4me you share a useful information.

    ReplyDelete
  12. What a great post!lingashtakam I found your blog on google and loved reading it greatly. It is a great post indeed. Much obliged to you and good fortunes. keep sharing.shani chalisa

    ReplyDelete