Sunday, 3 July 2016

तेरी पहचान

व्यर्थ समय गँवाया मैंने
जी को किया यूँ हीं हलकान
देख के तेरी मित्र-मण्डली
हो गई मुझको तेरी पहचान ----


9 comments:

  1. Kisne dil tod diya madam!

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    1. धन्यवाद सर .....😂 मेरा दिल टूट जाये ये हो नहीं सकता .....पर इस बातक उत्तर मेरे ब्लॉग धुंध के उस पार में मिलेगा जल्द हीं ...

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  2. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 05/07/2016 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

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    1. धन्यवाद कुलदीप जी।

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  3. "मैंने आज तुझे पहचान लिया है"

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  4. पहचान तो बहुत पहले लिया था राकेश जी बस कवि ह्रदय को ठोस बना रही थी.... ताकि कोई मलाल न हो कि मैंने अपना 100 प्रतिशत नहीं दिया। धन्यवाद ।

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