Saturday, 25 August 2012

तन्हा हूँ पर ......

भीड़ में अकेले रहने का हुनर
पेड़ हमें सिखाता है ...
प्रकृति  का पहरेदार
अटूट विश्वास का पाठ  पढाता है
नि:शब्द हमें वह कहता है .....
तन्हा हूँ पर ......
आओ बन्धु
दूंगा मदद की छांह
मुझमें समाया हुआ है
प्यारा सा इक गाँव
कल क्या होगा ??????
पता नहीं ...
जाता हूँ मै कहीं नहीं
रफ्ता -रफ्ता जिन्दगी का
साथ निभाए जाता हूँ ...
अपनी तन्हाई के संग
झूम -झूम के गाता हूँ ...
तुम भी आओ
तुम भी गाओ
तन्हाई से प्यार करो ...
मिल रहा है जो जीवन में
ख़ुशी -ख़ुशी स्वीकार करो ....

28 comments:

  1. प्रकृति से बहुत कुछ सीखा जा सकता है ॥सुंदर प्रस्तुति

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  2. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 27-08-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-984 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  3. भीड़ में अकेले रहने का हुनर
    पेड़ हमें सिखाता है ... छाँव देकर , फल देकर देने का हुनर भी देता है .... पेड़ , सन्यासी सा लगता है

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  4. प्रकृति से हम बहुत कुछ सीख सकते है...॥सुंदर प्रस्तुति

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  5. मिल रहा है जो जीवन में
    ख़ुशी -ख़ुशी स्वीकार करो ....
    सार्थक सन्देश देती सुन्दर रचना...

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  6. प्रकृति के माध्यम से आपने जीवंत कर दिया आपंने जड़ चेतन को

    तुम भी आओ
    तुम भी गाओ
    तन्हाई से प्यार करो ...
    मिल रहा है जो जीवन में
    ख़ुशी -ख़ुशी स्वीकार करो ....

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  7. सच कहा- प्रकृति से बहुत कुछ सीखा जा सकता है.

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  8. sahi kaha....

    http://apparitionofmine.blogspot.in/

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  9. वाह ... बेहतरीन भाव ...आभार

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  10. bahut sundar waah sach me prakruti hamen bahut kuch sikha deti hai .......:)) sakaratmak rachna

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  11. बहुत सुंदर...

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  12. प्रकृति से ही जीवन की सच्ची सीख मिलती है।
    बहुत अच्छी कविता।

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  13. तन्हा हूँ पर .....पेड़ सुनाता जीवन राग , . .तन्हा तन्हा मत सोचा कर ......औरों को भी कुछ सोचा कर ....बढ़िया पोस्ट ......महाकाल के हाथ पर गुल होतें हैं पेड़ ,सुषमा तीनों लोक की कुल होतें हैं पेड़ ...,जो तोकू काँटा बुवे ,ताहि को बोये , तू फूल ,तोकू फूल के फूल हैं ,वाकू हैं त्रिशूल (तिरशूल ).कृपया यहाँ भी पधारें -

    सोमवार, 27 अगस्त 2012
    अतिशय रीढ़ वक्रता (Scoliosis) का भी समाधान है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा प्रणाली में
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  14. बहुत सुन्दर पोस्ट

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  15. साकरात्मक सोच

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  16. बहुत सुंदर रचना
    क्या कहने

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  17. बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
    बधाई

    इंडिया दर्पण
    पर भी पधारेँ।

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  18. प्रभावी, प्रेरणादायी सोच....

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  19. बहुत सुंदर...

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  20. वृक्ष तनहाई का एहसास होने ही नहीं देते। वृक्षों के आसपास मैं खुद को कभी तनहाँ महसूस नहीं करता।

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  21. बहुत सटीक और सुन्दर विश्लेषण ....आभार

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