दौलत की खनक
शरीर का ताव
दिल बेताब
जब हो जाएगा
निढ़ाल,,,,,,
तब.…… बता ओ,,,,,,
स्वछन्द परिंदे
कैसे,,,,, गीत ख़ुशी के गाओगे ?
अभिमान के बुनियाद पे हो खड़े तुम
चैन कहाँ से पाओगे ?
अपने आसपास की झूठी महफिल को
कैसे तुम सजाओगे ?
छिनोगे तो छिन जायेगा
छोटी सी इक गलती तुझको
उम्र भर तड़पाएगी ....
सत्य को अपनाओगे तो
खुद को तुम पाओगे
चैन तुम्हें चहुँ ओर मिलेगा
जहाँ-जहाँ तुम जाओगे
झूठा अहम् और मिथ्याभिमान
के कवच को तोड़ तुम भागो
समय के रहते समय को पकड़ो
ओ नादान परिंदो जागो ,,,,







