Tuesday, 6 November 2012
Saturday, 3 November 2012
भावों के मोती
दिल के अन्तः पुर में,.......
ब्लोगर ......साथियों
हम सभी जानते हैं की
अत: प्रदूषणमुक्त पर्यावरण बनाना हमारी जिम्मेदारी है ....धन्यवाद ...
भावों के मोती ...
नैनन के अँसुवन में
सजनी पिरोती .........
ब्लोगर ......साथियों
हम सभी जानते हैं की
के मामले में पशु-पक्षी हमसे
आगे हैं .......पर अब वो भी हमको देख
बिगड़ने लगे हैं ......उनकी ... नाराजगी ...को
दर्शा रही मेरी ...कविता की ये पंक्तियाँ .....
देखिये सारस और हरे कबूतर के इन जोड़ों के
माध्यम से और संभल जाइए .......
नहीं तो .????????????????....
.. अब सजनी नहीं ...
सजना के आँखों में आंसू होंगे !
प्रदुषण बड़ा ख़राब होता है ....
Thursday, 1 November 2012
Monday, 29 October 2012
ओ बंजारे
नश्वर जीवन के इस क्रम में
प्रफुल्ल रहा करते हो ......
गठरी दौलत की नहीं है ...तभी ......
जहाँ -तहां विचरते हो !
नहीं चाह है किसी ख्याति की
नहीं फिकर है किसी आन की
चाहे कोई धता दे ......
ऐसे कैसे जी लेते हो ?
ओ बंजारे मुझे बता दे ...
नभ की असीमता को
नयनों में भरकर
हिंसक जीवों को बनाकर सहचर
निर्भय तुम सोते हो
मुझे बता दो ओ बंजारे
खुद का गम कैसे पीते हो ?
आज यहाँ ..
कल पता नहीं ...
कहाँ होगा ठिकाना ?
तेरी खुशियाँ ..
तेरे ग़मों को
किसने है पहचाना ?
नित नई जमीं बनाकर
आगे को बढ़ जाते हो
मुझे बता दो ओ बंजारे
कैसे उन्हें भूल पाते हो ?
हरपल नए ख़्वाबों में खोऊ
खवाब टूटे तो कभी न रोऊँ
वो मूलमंत्र बतला दो
जैसे भूल जाते हो सबकुछ
मुझको भी सिखला दो ....
जीवन तेरा जीवन है
बेख़ौफ़ घुमा करते हो
राह की बाधाओं से
दो -चार किया करते हो ....
जहाँ -जहाँ शाम मिले राहों में
डाल देते हो वहीँ डेरा
किसके तुम मनमीत हो ?
कौन मनमीत है तेरा ?
चलकर जिसके संग तुम
जश्न जीत की मनाते हो
ख़ुशी के पल हों या ..
दुःख के पल हों ...
झूम-झूम के गाते हो ..
कैसे गाना गाते हो ?
वो संगीत मुझे सिखा दो
ओ बंजारे अपने दिल के ..
सारे राज बता दो .......बताओगे ??????????????????
है हिम्मत ?
Monday, 22 October 2012
जाना है बड़ी दूर
राह की रंगीनियों में खो बैठे
प्यार मंजिल से करना था
प्यार रास्ते से कर बैठे ......
आँखें नम हैं
दिल है बहुत अधीर मत उलझो किसी राह में ......अभी ...
जाना है बड़ी दूर ....
राह को साथी बना कर
नादाँ दिल को समझाकर
आगे हर पल बढ़ना होगा
अगर चाहिए तुम्हे सुकूं तो ???
मंज़िल तक चलना ही होगा .....
मंजिल तक चलना ही होगा ...Thursday, 4 October 2012
एक झलक
चौराहे पर एक व्यक्ति जार -बेजार रो रहा है .
वहां से गुजरने वाले लोग उससके रोने का कारण नहीं पूछ
रहे हैं बल्कि अपनी-अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त रहे हैं ..आइये उनकी
प्रतिक्रिया के बारे में जाने ......किसी का दिल दुखाना मेरा इरादा नहीं है ..क्षमायाचना सहित ....
इंजीनिअर ----न खड़े रहे चौराहे पे
पोल मेरी खुल जाएगी
पोलिश इस जगह की
जब तेरे जूते से चिपक जायेगी .......
पुलिस वाला ----साला...शराब के नशे में
धुत पड़ा हुआ है
बीवी के डर से
बीवी के डर से
चौराहे पे खड़ा हुआ है ......
डोक्टर -----इसने तन की नहीं
मन की चोट खाई है
इसके रुदन में मुझे
इसकी प्रेमिका की छवि
नज़र आई है .....
जिसने बेदर्दी से इसके साथ
की बेवफाई है .........
प्रोफेसर ----अरे भाई ! रोते क्यों हो ?
कौन है इसका जिम्मेदार ?
चाहे जो कोई भी है ...
है वही तुम्हारी बधाई का हक़दार ...
वजह से जिसकी तुम रो रहे हो ....
" रोनेवाला ही गाता है "
इसे क्यों भूल गए हो ???
जाओ तुम घर अपने ..
चौराहे पे क्यों पड़े हुए हो ??
इसके बाद वहां एक और
शख्स आया ---क्या पता है ये कोई
मुसीबत का मारा या...
किसी वजह से खुद को
साबित कर रहा है
लाचार और बेसहारा .....
पता चले मुझको तो ?
इसके गम सारे हर लूं
घर का रास्ता बता दे कोई तो ?
घर इसके पहुंचा दूं ......
भावनाओं के सागर में वो
यूँ गोते लगा रहा था जैसे
बदली के साथ आँख -मिचौनी
करता है रवि
हाँ ...वो था ----
शहर का एक ....
जाना-माना कवि....
Friday, 28 September 2012
जहाँ न हो
ब्लोगर साथियों मेरी कविता "जहाँ न हो " की दो पंक्तियाँ मैंने २००२ में सपने में सुना था जो तब से मेरा पीछा कर रही थी इससे पीछा छुड़ाने के लिए
मैंने आज उसे पूर्णता प्रदान करने की कोशिश की है ..
पता नहीं मैं कहाँ तक कामयाब हो सकी हूँ अपने विचारों के द्वारा जरुर अवगत कराएँगे ..धन्यवाद ....
डोलिया में बिठाये के कहार
ले चल किसी विधि मुझको उस पार ...
जहाँ न हो किसी के खोने का अंदेशा
जहाँ न हो कोई दुःख-दर्द और हताशा
जहाँ न हो कोई उलझन और निराशा
जहाँ न हो कोई भूखा और प्यासा
जहाँ न हो कोई लाचार..बेचारा
जहाँ न हो कोई तेरा और मेरा
जहाँ न हो कोई अपना और पराया
ले चल किसी विधि मुझको उस पार ...
जहाँ न हो किसी के खोने का अंदेशा
जहाँ न हो कोई दुःख-दर्द और हताशा
जहाँ न हो कोई उलझन और निराशा
जहाँ न हो कोई भूखा और प्यासा
जहाँ न हो कोई लाचार..बेचारा
जहाँ न हो कोई तेरा और मेरा
जहाँ न हो कोई अपना और पराया
जहाँ न हो कोई मोह और माया
जहाँ न हो किसी को किसी से विरक्ति
जहाँ न हो कोई शक्ति और आसक्ति
जहाँ न हो किसी को किसी से विरक्ति
जहाँ न हो कोई शक्ति और आसक्ति
मुंहमांगी दूँगी तुमको उतराई
तहेदिल से दूँगी तुम्हें जीत की बधाई ...
मिलकर इस जीत की खुशियाँ हम मनाएंगे
अतीत की दर्दीली इन गलियों में
वापस नहीं हम आयेंगे
खुशियों से दमकेगा प्यारा वो संसार ...
ले चल किसी विधि मुझको उस पार ......
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